कविता - प्रीती



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चौखट सुन
प्रीती मेरे घर आ रही है
तु अहंकार के वशिभुत्त होकर
देहरी से दरवाजा बंद करने को ना कहना
ना ही तु दरवाजे को भय दिखाना
भय....हवा से उसके टूट जाने का
घर को छल्ले जाने का
चोरों के अंदर आने का

चौखट सुन
देख तु प्रीती का ,
देहरी को गलत परिचय ना देना
उसको चोर या डकयेत ना कह देना
उसके हाथों में रखे प्रेम को
तु खंजर ना कह देख
देख तुु प्रीती का गलत परिचय ना देना
....nisha nik(ख्याति)...

यह एक प्रतिकात्मक कविता है...
इस में चौखट मष्तिस्क का, देहरी दिल का और दरवाजा मन का प्रतिक स्वरूप में है


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